History of School

Chapra Central School, Chapra established by the renowned freedom fighter, visionary and educationist Late Sri Kapildev Prasad Shrivastava in 1994. The school runs under the aegis of Brajkishore Memorial Trust comprising of expert educationist and committed social workers.

The foundation stone of the sprawling campus was laid on 19th April 2000, in a lush green garden and orchard away from the din and bustle of the Chapra town at Sandha, Chapra. Now more than 60 rooms are in use for regular classes, library, laboratory, sports, music, computer, sick room and office.

The school was affiliated to C.B.S.E. up to Std. X in April 2002 and upgraded to Std. XII in 2009. Chapra Central School is co-educational with English as the medium of instruction. The excellent academic standard of the school can be judged by the fact the toppers for both boys and girls gotover 95% in the Science stream of the C.B.S.E. Std. 10 examination for 2004.In 2008, the topper AayamBhardwajscored 97.4%. Our students have performed brilliantly at both academic and in sportscompetitionsat state and national levels.They have brought laurels to the school inmathematics, science andcomputer olympiads and championships of taekwondobadminton, chess etc. Apart from academics there is emphasis on sports, games,debates, elocution skills, group-discussions, painting, drawing, dramatics, tree-plantation, science exhibitions, DNA club and other philanthropic activities. The alumni of the school have contributed considerably in every walk of our national life and the school feels very proud of them.

The fulfillment of these goals is ensured by the enlightened leadership of the Founder Principal and Director, Mrs. DharmshilaShrivastava, the Secretary Dr. Pankaj Kumar, Professor in Political Science at Allahabad University and former member, U.P.Public Service Commission and Joint secretary, Dr. Neeraj Kumar, awell-known Scientist and Executive Secretary in the National Academy of SciencesIndia (NASI), Allahabad, a premier government institute for the promotion of scientific activities in India.

The school has adopted the norm of 25% seats reservation for BPL students as per the ‘Right to Education Act 2010’,notified by the Govt. of Bihar.

विद्यालय का संक्षिप्त इतिहास

छपरा सेंट्रल स्कूल, छपरा का इतिहास इसकी स्थापना की संकल्प तिथि 26 जनवरी 1994 से प्रारंभ होता है। इस षुभ तिथि पर पधारे अभिभावक एवं गण मान्य अतिथियों ने छपरा में जय प्रकाष महिला महाविद्यालय, ब्रजकिषोर किंडरगार्टन, फणिभूशण नृत्य-संगीत एकेडेमी, आयुर्वेद काॅलेज और अन्जुमन खिदमते ए सुखन जैसे ज्ञान-संदीपों से समाज को आलोकित करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी एवं षिक्षाविद् श्री कपिलदेव प्रसाद श्रीवास्तव से मिलकर छपरा में सी0 बी0 एस0 ई0 से संबंद्ध एक मानक माध्यमिक विद्यालय खोलने का अनुरोध किया। सुखद आष्चर्य का विशय यह रहा कि महामना श्रीवास्तव जी ने सभी अभिभावक प्रतिनिधियों का समादर करते हुए अपने जीवन की संध्या बेला में भी उशा की ताजगी के साथ छपरा सेंट्रल स्कूल, छपरा के नाम से एक उच्च विद्यालय खोलने हेतु अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। साथ ही बिना देरी के चालू सत्र 2 अप्रैल 1994 से ब्रजकिषोर किंडरगार्टन-प्रांगण में ही इसका षुभारंभ कर दिया। षीघ्र ही एक विद्यालय संचालन समिति गठित की गई जिसके सुझाव पर ब्रजकिषोर किंडरगार्टन की ख्यातिप्राप्त एवं अनुभवी प्राचार्या  श्रीमती धर्मषीला श्रीवास्तव (सहधर्मिणी श्री कपिलदेव प्रसाद श्रीवास्तव) को इस नव संस्थापित उच्च विद्यालय के प्राचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। विद्यालय सी0 बी0 एस0 ई0 के पाठ्यक्रमानुसार संचालित होने लगा।
बिहार सरकार से अनापति प्रमाण पत्र मिलने के साथ सी0 बी0 एस0 इ0 दिल्ली से संबद्धता की कारवायी प्रारंभ कर दी गई। उसी क्रम में इस नव स्थापित विद्यालय के भवन निर्माण के लिए इन्होंने छपरा-साढ़ा राजमार्ग के समीप ब्रजकिषोर मेमोरियल ट्रस्ट के नाम से 3) एकड़ का एक ही विस्तृत भू-खंड क्रय किया गया और 20 अप्रैल 2000 के षुभ मुहूर्Ÿा पर समारोह पूर्वक भूमि-पूजन करने के पश्चात् इस पर विद्यालय निर्माण संबंधी प्रांरंभिक कार्य प्रारंभ कर दिया। 15 मार्च 2001 से विद्यालय के षैक्षणिक भवन का निर्माण कार्य प्रांरभ हुआ। पर नियति की क्रूरता आपके करिष्माई व्यक्तित्व पर भारी पड़ी। आप अचानक बीमार पड़ गये, फलतः  विद्यालय का निर्माण कार्य षिथिल पड़ गया। 22 जुलाई 2001 को उनके देहावसान के उपरांत उनके ज्येश्ठ पुत्र डा0 पंकज कुमार को उपरोक्त दोनों संगठनों का सचिव एवं डा0 नीरज कुमार को संयुक्त सचिव बनाया गया। साथ ही स्व0 कपिलदेव प्रसाद श्रीवास्तव की धर्मपत्नी, संस्थापिका प्राचार्या श्रीमती धर्मषीला श्रीवास्तव को विद्यालय की संरक्षिका सह निदेषिका के पद पर प्रतिश्ठित किया गया। उच्च षिक्षा एवं माध्यमिक षिक्षा से जुड़े सेवानिवृत प्रो0 महेन्द्र प्रसाद और पूर्व प्राचार्य मुरली मनोहर प्रसाद को षैक्षणिक सलाहकार के पद पर नियुक्त कर उनसे सम्यक् मार्गदर्षन की अपेक्षा की गई।
इसी  बीच 2 अप्रैल 2002 से विद्यालय को सी0 बी0 एस0 ई0 से विधिवत् संबद्धता प्राप्त हो गइ और विद्यालय पूर्ववत् ब्रजकिषोर किंडरगार्टन परिसर में संचालित होता रहा। इधर नये भूखण्ड पर षैक्षणिक-भवन का निर्माण कार्य षनैः-षनैः बढ़ता गया। प्रस्तावित भवन लगभग 75 हजार वर्गफिट (लगभग 7 हजार वर्गमिटर) में 12 1/2 वर्शों में बनकर तैयार हुआ है। यह भूतल समेत कुल चार तलो पर स्थित है (ग्राउण्ड $ 3); जिसमे लगभग 60 वर्ग कक्ष, संपन्न एवं सुसज्जित पुस्तकालय-वाचनालय, विशयवार वृहदाकार विज्ञान विशयों की सामग्री-  प्रयोगषालाएँ, छात्र संख्या के अनुरूप विषाल कंप्यूटर षिक्षा कक्ष, अनेक स्मार्ट कक्षाएँ, संगीत षिक्षा कक्ष, आंतरिक खेलकूद कक्ष, सामग्री भंडार कक्षा सहित तलानुसार षौचालय, पेय जल प्रकोश्ठ, अस्वस्थ छात्र-छात्राओं के लिए विश्राम सह प्राथमिक चिकित्सा कक्ष, तलानुसार प्रषासनिक कक्ष आदि इस विद्यालय में विनिर्मित हैं। भवन निर्माण प्राकलन और नक्षे के अनुसार दक्ष एवं अनुभवी आर्किटेक्ट एवं अभियंताओं की देखरेख में संपन्न हुआ है।
सन् 2009 से इस विद्यालय को सीनियर सेकेंडरी स्तर की उच्चीकृत मान्यता प्राप्त हो गई। यह संस्था इस राज्य के प्रतिश्ठित विद्यालयों में अग्रणी स्थान रखती है जिसमें वर्तमान में लगभग 80 कुषल अनुभवी एवं प्रषिक्षित षिक्षकों की देख-रेख में 2500 छात्र-छात्राये एक साथ षिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान में कक्षा 1 से 12 तक 51 सेक्षन संचालित हो रहे हैं। यहाँ से निकले छात्र-छात्राओं ने देष और विदेष में अलग मुकाम हासिल किया है।
संक्षिप्त विवरण के अन्तर्गत कहा जा सकता है कि यह विद्यालय पूर्णतः व्यावसायिकता से परे समाज सेवा की भावना से संचालित है। यह किसी प्रकार का दान नहीं ग्रहण करता। यह आंतरिक वित्तीय संसाधनों पर निर्भर स्व-वित्त पोशित संस्थान है, जो नो-प्रोफिट नो-लाॅस के सिद्धांत पर संचालित है। यह पूरा परिसर षांतिपूर्ण दखलकब्जे में और किसी भी विवाद से परे है (संलग्नक-1) । यह विद्यालय षिक्षा के अधिकार के अन्तर्गत नियमानुसार 25ः स्थान छात्र-छात्राओं के प्रथम वर्ग में प्रवेष के समय सुरक्षित रखता है। निश्कर्शतः कहा जा सकता है कि यह विद्यालय अपने प्रबंधकीय नेतृत्व में गुणात्मक षिक्षा के माध्यम से उत्कृश्ट समाज सृजन के संकल्प को सतत् सचेश्ट होकर संपन्न करने में संलग्न है। समाजवादी सोच के कारण निजी क्षेत्र में होने के बाद भी यह समाजिक सारोंकारों में भी बढ़ चढ़ कर भाग लेता है।
संलग्न यथोपरी-